जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और फीस बढ़ोतरी के विरोध की आड़ में टुकड़े टुकड़े गैंग एकबार फिर से सक्रिय हो गया है। जेएनयू में फीस वापसी को वापस लिए जाने के बाद स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा के साथ छेड़छाड़ करना निंदनीय होने के साथ घृणित भी है। जेएनयू से संसद तक मार्च और राष्ट्र विरोधी विचारों को स्थापित करने का प्रयास को किसी भी तरह से सही नहीं माना जा सकता है। देश के शीर्ष विश्वविद्यालय से निकला यह संदेश पूरे विश्व में देश की छवि को नुकसान पहुंचाने वाला है। जेएनयू में बौद्धिकता के नाम पर केंद्र की सरकार विरोधी रवैया के साथ राष्ट्रीय मीडिया के खिलाफ नारेबाजी के दौरान छात्रों की भीड़ में आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल गैर संवैधानिक भी है। फीस बढ़ोतरी को वापस लिए जाने के बाद भी लगातार विरोध प्रदर्शन करना इस बात को दर्शाता है कि छात्रों की अगुवाई करने के नाम पर कुछ लोग शिक्षा के मंदिर के माहौल को बिगाड़ना चाहते हैं। इनकी साफ मंशा है कि जेएनयू में शिक्षा का माहौल किसी भी तरह से न रहे। इनके नापाक मंसूबों को समझने के साथ ऐसे लोगों के चेहरे के पीछे छिपे चेहरे क...